Aug 20, 2008

Shayari (Written by unknown person)

..फ़लक को ज़िद है अगर बिज़लियां गिराने की
हमें भी ज़िद है वहीं आशियाँ बनाने की


मेरी खामोशियों में भी फसाना ढूंढ लेती है,
बड़ी शातिर है ये दुनिया बहाना ढूंढ लेती है,
हकीकत जिद किए बैठी है चकनाचूर करने को,
मगर हर आंख फिर सपना सुहाना ढूंढ लेती है"!!!


तिनका तिनका तूफ़ान में बिखरते चले गए
तन्हाई कि गहराइयों में उतरते चले गए
उड़ते थे जिन दोस्तो के सहारे आसमानों में हम
१-१ करके हम सब बिछड़ते चले गए

तेरी एक हँसी पे ये दिल कुर्बान कर जाऊ ,
ऐतराज़ न हो अगर तो तेरा दिल चुरा ले जाऊ ,
न बहने दुँ कभी इन आखों से आंसू ,
तू कहे तो तेरे सारे सितम सहे जाऊ .