Oct 16, 2009

शुभ दीपावली

शुभ दीपावली

आप सभी को दीपावली की ढेरों शुभ कामनाएं

Oct 2, 2009

नरेगा का नाम बदला

भारत सरकार ने नरेगा (National Rural Employment Guarantee Act) का नाम बदल करके Mahatma Gandhi Rural Employment Guarantee Act कर दिया है। ऐसा करने के पीछे क्या कारण है वोह तो पता नहीं पर लगता है की इसका नाम महात्मा गाँधी पर रखने से इस योजना में जो धांधलियां हो रही है वोह अपने आप रूक जाएँगी । और सब लोग ईमानदारी से इस योजना को सफल बनाने में जुट जायेंगे !!!

गाँधी जी का नाम लिखने भर से ही योजना सफल होने की गारंटी मिल गई ।
ऐसा लगता है की योजना का नाम अगर मात्र से ही हमारे देश के नवयुवको को रोजगार की आशा बढ़ जायेगी और महात्मा गाँधी जी स्वर्ग में बैठे बैठे ही रोजगार उपहार स्वरुप देदेंगे अगर ऐसा हो सकता है तो मैं तो यही सुझाव दूँगा की सभी योजनाओ के नाम बदल कर गाँधी जी के नाम पे ही रख देने चाहिए।


अब मेरी नासमझ जिज्ञासा ........

क्या योजना का नाम बदलने से सरकारी कागजो पर नाम बदलने का अतिरिक्त खर्च नहीं आएगा .......??? शायद उस खर्चे से कुछ और लोगो को रोजगार मिल सकता था या यह पैसा किसी उचित और महतवपूर्ण कार्य में खर्च हो सकता था

क्या हमारे देश के पास फालतू पैसा है ऐसे फिजूल के कामों पे खर्च कने के लिए ????


आपका जिज्ञासु

सौरभ शर्मा

Aug 24, 2009

एक भूली बिसरी सवारी

दोस्तों इस शनिवार को मैंने एक काम बहुत दिनों या कहो सालों बाद किया। सोच सकते हो क्या काम ????
(बहुत सारे काम हो सकते हैं ..... !!!) मैंने कुछ चलाया अब कुछ समझ आया .....?
दोस्तों दुपहिया वाहन चलाया . नहीं नहीं ... मोटर चालित नहीं वोह तो रोज ही चलाते रहते हैं ।
बिना मोटर वाला दुपहिया । साईंकिल चलाई दोस्तों बहुत सालों बाद । पहले तो शुरू में चलाई ही नहीं गई । मन में विचार आया की क्या मैं साईकिल चलाना भूल गया क्या ???

पर फ़िर थोडी देर बाद चल ही पढ़ी, बहुत अच्छा लगा इतने सालों बाद साईकिल चलाके ।

सौरभ शर्मा

Aug 19, 2009

बुरा भला: नेताजी की मृत्यु १८ अगस्त १९४५ को विमान दुर्घटना में नहीं हुई थी !!

एक ऐसा चिट्ठा जो हर किसी को कम से कम एक बार तो पढ़ना ही चाहिए। तथ्य परक जानकारी का भण्डार है।
नीचे दिए कड़ी पर चटका दीजिये

बुरा भला: नेताजी की मृत्यु १८ अगस्त १९४५ को विमान दुर्घटना में नहीं हुई थी !!


सौरभ शर्मा

Aug 14, 2009

शुभ जन्माष्टमी

जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई।






भगवान् कृष्ण आपकी सभी मनोकामनायें पूर्ण करें।






आपको राधा रानी का दूलार मिले। वृन्दावन सा उल्लास मिले।














सौरभ शर्मा

Aug 13, 2009

मेरे दोस्त की शुरुआत

दोस्तों ब्लॉग की दुनिया में मेरे दोस्त ने कदम रखा है, उसके ब्लॉग का पता है
मेरी कलम से.....

मेरी शुभ कामनाएं है उसको ....

Jul 30, 2009

वृक्ष और नर नारी



पुरूष (नर) और नारी में जो भिन्नता है उसको समझने के लिए एक उदाहरण लेते हैं। अगर दोनों को हम वृक्ष के जैसा समझे तो वोह वृक्ष जो झुकते नहीं है तन के खड़े रहते हैं वोह नर और जो झुक जाते हैं वोह नारी । मेरी इस उपमा को स्वीकार करते हो?

कौन से वृक्ष झुकते हैं ? - जो फलों से लदे होते हैं और नारी को ही फल यानि बच्चे होते हैं , और विभिन्न परिस्तिथियों में नारी ही झुकती हैं। परन्तु नर तन कर परिस्तिथियों का सामना करते हैं । सो नर और नारी को वृक्ष से रूपित करना सही हैं ना !!!!!

परन्तु यह हम सब जानते हैं कि जब आंधी आती हैं तो जो वृक्ष झुकते नहीं हैं वोह टूट जाते हैं जबकि जो वृक्ष फलों से लदे होते हैं और झुक जाते हैं वोह आंधी को सह जाते हैं । उसी तरह जब आंधी जैसी विकट परिस्तिथि आती हैं तो नारी तो सह जाती हैं परन्तु हम नर उसको सह नहीं पाते। उन परिस्तिथियों में हमें शक्ति स्वरूपा नारी के पास ही जाना पड़ता हैं ।

कैसी लगी आपको यह उपमा ?

आपका जिज्ञासु
सौरभ शर्मा

Jul 24, 2009

एक कविता -- दूसरे ब्लॉग से

मैं ऐसे ही चिट्ठो को पढ़ रहा था की एक कविता ने मन मोह लिया और कुछ सोचने पे मजबूर किया । ब्लॉग का यहाँहै एड्रेस

कविता ये है :-

हे राम,तुम कौन हो,
एक कवि की कल्पना,
या इस देश के दुर्भाग्य की अल्पना,
कौन हो तुम प्रमाण चाहिये,
तुम्हारे होने का सूक्ष्म ही सही,
इतिहास में कुछ परिमाण चाहिये,
ऐतिहासिक प्रमाणों के बिना हम कुछ भी नहीं मानेंगे,
यदि इतिहास में दर्ज नहीं होगा तो अपने बाप को भी बाप नहीं मानेंगे,
क्यों नहीं कराया अपने पैदा होने का रजिस्ट्रेशन,
बिना मतलब में करा दिया इतना फ्रस्ट्रेशन,
पता नहीं बाल्मीकि ने तुमको कहां से खोज लिया
और तुलसी ने क्यों रच दिया एक ग्रन्थ,
संभवत: साम्प्रदायिकता की भट्टी में झोंकना चाहते थे ये कवि,
और लोकतन्त्र में गद्दी हडपना चाहते थे ये सभी,
इसीलिये रचना कर दी राम की,
कल्पना की उडान तो देखिये, न काज की न काम की,
बापू तुम्हें भी कोई और नहीं मिला,
और धर्मों के भी ईश्वर थे,किसी को भी चुन लेते,हमें इस पचडे में डाल कर तुम्हें क्या मिला,
तुम तो सबसे बडे धर्म निरपेक्ष थे,
मानवता के सापेक्ष थे,
तुम्हें भी नहीं सूझा और कोई नाम,
अन्तिम समय में भी बोल गये हे राम,
और राम ने भी क्या दिया,
राम-जन्म भूमि विवाद,
दंगा और फसाद,
एक पुल,
जो है पुराना कुछ एक हजार साल,
पुरानी चीजों को स्टोर करेंगे,तो बदबू ही पायेंगे,
परिवर्तन संसार का नियम है,
नया पुल बनता
है तो कमीशन तो कम से कम मिलता है,
राम को जपेंगे तो क्या पायेंगे,
सारे वोट तो धर्म-निरपेक्षी ले जायेंगे,
दूसरों के भगवान भगवान हैं, अपने तो हैं बस एक कल्पना,
जिसके लिये क्या कलपना,
राम कौन सा वोट दिला देंगे,
कौन सा चुनाव जिता देंगे,
क्या बनवा देंगे पार्षद, सांसद या विधायक,
इसलिये हे नालायक,
बन्द कर जपना राम का नाम,
सुबह और शाम।


साभार : इंडियन सिटिज़न

क्या आपको भी कुछ सोचने पर मजबूर करती है ???

जिज्ञासु
सौरभ शर्मा

Jul 20, 2009

कांवड़ यात्रा और भक्ति

आज कल कांवड़ यात्रा का जोर है यह यात्रा हरिद्वार से गंगा जल ले कर शुरू होती है और श्रावण मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दर्शी तिथि को शिवलिंग पर गंगा जल अर्पित करने पर ख़तम होती है। इस दौरान दिल्ली - हरिद्वार राज मार्ग पर वाहनों का आना जाना निषिद्ध होता है। केवल कांवड़ यात्री ही इस मार्ग का उपयोग कर सकते हैं । दिल्ली में भी कई मुख्य मार्ग इसी वजह से बंद होते हैं की यात्रियों को कोई असुविधा न है। बड़ी ही भक्ति पूर्ण यात्रा है यह अगर भक्ति के साथ की जाए तो।

हमारे मोहल्ले की ऐसे सभी लड़के जो कुछ नहीं करते हैं और निट्ठल्ले घुमते हैं श्रावण महीना आते ही व्यस्त हो जाते हैं और यात्रा पे निकल जाते हैं। उनके माता पिता शान्ति की साँस लेते हैं की चलो कभी तो पूजा पाठ की तरफ़ ध्यान दिया बेटे ने (या इसलिए की चलो कुछ दिन तो शान्ति से गुजरेंगे !!) ऐसे लोगों का एक ही मकसद होता है की मजे करो। लोगो से अपनी खातिर दारी करवाओ और मौका मिले तो दंगा करो।

पहले के लोगों में भक्ति होती थी, मेरे मामा जी १० साल पहले कांवड़ लाते थे और बोलते थे की हम लोग गाँवों से दूर दूर खेतों से ही जाते थे ताकि कोई हमारी सेवा करके हमारा पुण्य न बाँट ले । उस समय किसी से सेवा करवाना यानि अपना पुण्य बाँट लेना होता था । कष्ट उठा के यात्रा करने से मन भगवान् में ही लगा रहता था । पर आज कल तो यात्री सेवा करवाने में मजे लेते हैं । और अगर कहीं उनको कष्ट उठाना पड़ जाए तो हंगामा कर देते हैं जैसे वोह हम पर एहसान कर रहें है कांवड़ ला कर ।

ऐसी कांवड़ लाने कोई फायदा ? ?

आपका जिज्ञासु
सौरभ शर्मा

Jul 6, 2009

आधुनिक भारत के युवा।

कल हम कुछ लोग फ़िल्म देखने के लिए सिनेमा हाल गए। फ़िल्म का नाम था "कम्बक्त इश्क " । इसलिए जाहिर है की युवा ही ज्यादा थे दर्शकों में। फ़िल्म शुरू होने से पहले एक विज्ञापन आया की राष्ट्र गान के लिए खड़े हो जाईये। और यह देख के की पूरा हाल खड़ा हो गया अपने राष्ट्र गान के लिए , मन खिल उठा । गर्व महसूस हुआ की हाँ हम भारत माता की संतान है ... और हम में अपने देश और अपने सैनिकों के लिए इज्जत है ।

क्या हम हाल के बाहर भी राष्ट्र गान के सम्मान में खड़े होंगे ????

आपका जिज्ञासु
सौरभ शर्मा

Jun 26, 2009

मेट्रो का झुक कर स्वागत करना,

मैं दिल्ली मेट्रो द्वारा अपने ऑफिस आता जाता हूँ और कई बार देखा है कि लोग लाइन पर झुक कर मेट्रो का इंतेजार करते हैं। मेरे को कभी यह समझ नहीं आया कि लोग इस तरह अपनी जान का रिस्क उठा कर मेट्रो को क्यों देखते हैं?
क्या इस तरह देखने से मेट्रो जल्दी आ जायेगी ???

पता नहीं हो सकता है आ जाती हो !!!! तभी लोग अपनी जान की फ़िक्र न करके ऐसा करते हैं...

आपका जिज्ञासु,
सौरभ शर्मा

Jun 22, 2009

दिल्ली में शराब घर बैठे ही मिलेगी

आज सुबह दैनिक जागरण अखबार जैसे ही उठाया, तभी एक प्रथम प्रष्ट की ख़बर पर नजर पड़ी। ख़बर थी की अब दिल्ली में शराब घर बैठे ही मिलेगी। दिमाग में एक दम विचार कौंधा की सही बात है दिल्ली के लोगों को तो पानी की नहीं शराब की ज्यादा जरुरत है । क्योंकि पानी के लिए तो जल बोर्ड के कई बार चक्कर लगाने पड़ते है तब जाके अगर किस्मत अच्छी है तो पीने का पानी मिल जाता है। पर शराब पीने के लिए तो अब कोई झंझट उठाने की जरुरत ही नहीं।

उसी लेख में लिखा था की दिल्ली सरकार शराब क्रय करने की निम्नतम आयु सीमा भी घटाने वाली है अभी यह सीमा २१ वर्ष है उसको घटा के १८ वर्ष करने वाली है। ताकि युवा लोगों को कोई दिक्कत न हो।

यही है हमारी दिल्ली सरकार ।
क्या यह सरकार पीने के पानी के लिए भी कुछ सोचेगी ??????

जिज्ञासु
सौरभ शर्मा

May 18, 2009

चुनाव परिणामो का निष्कर्ष

इन आम चुनावो के परिणाम देख के जो निष्कर्ष निकाल पाया हूँ ,
उनको आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ ।
१ जनता अब युवा नेता चाहती है , जो देश की हालत सुधार सके।
२ जनता विकास चाहती है ।
३ जनता सौदेबाजी करने वाले छोटे क्षेत्रीय दल नहीं चाहती ।

क्या कांग्रेस, भाजपा और अन्य राष्ट्रीय दल यह बात समझ पाएंगे ?

आपका जिज्ञासु

सौरभ शर्मा

Apr 29, 2009

नेता कैसे ???

अमेरिका का हूवर अवार्ड हमारे पूर्व राष्ट्रपति को !

अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने इंजीनियरिंग जगत का मानवता के लिए दिए जाने वाला सबसे महत्तवपूर्ण अवार्ड हूवर अवार्ड भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री ऐ पी जे अब्दुल कलाम जी को दिया।
कलाम जी को बधाई !
वोह इस अवार्ड को पाने वाले पहले भारतीय ही नहीं बल्कि पहले एशिआई भी हैं।
इस अवार्ड ग्रहण समारोह में उन्होंने ४ सूत्री योजना भी बताई जिसके द्वारा भारत एक विकसित और अमीर देश बन सकता है।

ऐसे होते हैं नेता या कहें की ऐसे होने चाहिए हमारे देश के सूत्रधार !! पर अफ़सोस अभी के परिद्रश्य में तो नेता केवल अपने को और अपने परिवार को कैसे अमीर बनाया जाए और कैसे जनता को बेवकूफ बनाया जाए इसी २ बिन्दु कार्ययोजना पर काम करते हैं।
पर इन नेता लोगों को चुनता कौन है ??? हम, हम लोग । क्यों चुनते हैं हम ऐसे नेता जो हमारा भला नहीं कर सकते, जो देश के बारे में गलती से भी नहीं सोचते।

हम तो कलाम जैसे नेताओं को दुबारा राष्ट्रपति न बनने देने वाले नेताओं से यह भी नहीं पूछते कि वोह हमारे वोट और इच्छाओं के साथ विश्वासघात क्यों करते हैं !!!!!!

क्या हमको याद है कि आजकल हमारे राष्ट्रपति भवन में कौन विराजमान है !!! और क्यों ???

हमें कुछ सोच समझ कर ही अपने वोट का इस्तेमाल करना चाहिए । जिसको हम वोट कर रहे है क्या वोह इसके लायक है ?????

आपका जिज्ञासु
सौरभ शर्मा






Apr 27, 2009

भगवान् परशुराम जयंती की शुभकामनायें

भगवान् परशुराम जयंती की शुभकामनायें

आज अक्षय तीज है। आज के ही दिन भगवान् विष्णु परशुराम के अवतार में धरती पे अवतरित हुए थे।
आप सभी को अक्षय तीज और परशुराम जयंती की शुभकामनायें।

आपका
सौरभ शर्मा

Mar 27, 2009

नव संवत्सर २०६६ की शुभ कामनायें

सबसे पहले आप सभी को नव संवत्सर २०६६ की शुभ कामनायें !!!
आज चैत्र शुक्ल प्रतिपदा है यानि भारतीय नव वर्ष का प्रथम दिन ।बसंत ऋतु में जब हर तरफ हरियाली छा जाती है मौसम सुहाना हो जाता है और प्रकृति नई अंगडाई लेती है तभी नया भारतीय संवत शुरू होता है खेतों में नई फसल की उमंग, पतझर के बाद वृक्ष पे भी नए पत्ते आ जाते हैं, यह सब हमे याद दिलाता है की हर दुःख के बाद सुख है , हर रात के बाद सुबह है , गम के बाद खुशी है , लगता है प्रकृति भी जैसे नव वर्ष का अभिनन्दन कर रही हो। वातावरण में हर तरफ़ खुशियाँ ही खुशियाँ , उल्लास का माहोल....


किंतु अफ़सोस लोगो को आज के दिन फुर्सत ही नही है नए साल का अभिवादन करने की। अंग्रेजी सभ्यता से इतने रुबरु हो गए है की भारतीयता तो जैसे भूल ही गए है।
आज सुबह सुबह मैंने अपने कई दोस्तों और पारिवारिक मित्रों को एस एम् एस (SMS) द्वारा शुभ कामनाएं दी, पर जैसी उम्मीद थी केवल कुछ ही लोग समझ पाए की यह किस अवसर पर शुभ कामनायें भेजी है !!! विश्व के लगभग सभी देश अपने अपने कैलंडर के अनुसार नववर्ष मनाते हैं पर हम भारतीय तो महान है जहाँ लोगो को अपना नववर्ष भी नहीं पता की कब आता है ।

इस शुभ अवसर पर ईश्वर से प्रार्थना है की यह नव संवत्सर आपके जीवन में नव उमंग, नव उत्साह, नव चेतना और नव खुशियों का संचार करें।

शुभ कामनाओं सहित
सौरभ शर्मा

Mar 24, 2009

क्या ख़ूबसूरत हैं

ख़ूबसूरत हैं वोह लब
जो प्यारी बातें करते हैं
ख़ूबसूरत है वोह मुस्कराहट
जो दूसरों के चेहरों पर भी मुस्कान सजा दे
ख़ूबसूरत है वोह दिल
जो किसी के दर्द को समझे
जो किसी के दर्द में तडपे
ख़ूबसूरत हैं वोह जज्बात
जो किसी का एहसास करें
ख़ूबसूरत है वोह एहसास
जो किसी के दर्द में दवा बने
ख़ूबसूरत हैं वोह बातें
जो किसी का दिल न दुखाएं
ख़ूबसूरत हैं वोह आंसू
जो किसी के दर्द को महसूस करके बह जाए
ख़ूबसूरत हैं वोह हाथ
जो किसी को मुश्किल वक्त में थाम लें
ख़ूबसूरत हैं वोह कदम
जो किसी की मदद के लिए आगे बढें !!!!!
ख़ूबसूरत है वोह सोच
जो किसी के लिए अच्छा सोचे
ख़ूबसूरत है वोह इन्सान
जिस को खुदा ने ये
खूबसूरती अदा दी

-- जिज्ञासु
सौरभ शर्मा

Mar 12, 2009

होली जो हो ली

होली भी हो ली अब। मैंने कैसे बने होली ?....... चलो बताता हूँ। कल सुबह सुबह उठ के नहा के पूजा की और नाश्ता किया ( यहाँ ख़तम नहीं होती, फ़िल्म अभी बाकि है मेरे दोस्त ... :-) )
ठंडी हवा को देखते हुए हर बार की तरह यह सोचा की अबकी बार कोई रंग और पानी नहीं बस दूकान जा के चंदन और गुलाल लेके आगया। अभी तो होली वाले कपड़े ( यार कोई ख़ास कपड़े नहीं बस थोड़े पुराने कपड़े) पहने भी नहीं थे की पड़ोसी आगये होली खेलने...
सभी अपने से बड़े लोगो के चंदन का टीका लगा के आशीर्वाद लिया गया और अपने बराबर वाले और छोटो को गुलाल लगाया गया। फ़िर ध्यान आय अयार अभी तो अपनी धर्मपत्नी और बेटे के साथ भी होली नहीं खेली तो पहले मम्मी पापा , पत्नी और बेटे को चंदन लगा के होली की मुबारकबाद दी। तभी नीचे से हमारे किराये पे रहने वाले भाई भाभी आगये उन्होंने तो बस पानी की बाल्टी भरी और दाल दिया मेरे और पत्नी के उप्पर ... ठण्ड में भीग गये सारे...
फ़िर तो हमें भी जोश आगया ठण्ड को भूल कर पिछले साल वाले रंग की डिब्बी ढूंढी और हम भी लग गये दुसरे लोगो को भिगोने और रंग लगाने ...
११ बज चुके थे की तभी याद आया की मेरी चचेरी बहन जिसकी दिसम्बर में शादी हुई थी की शादी के बाद पहली होली है और हमारे बहनोई आयेंगे होली खेलने सो हम सपत्नीक उनके घर ही चल दिए मोटर साइकिल पे। वहां पहुँच के पता चला की वोह तो अभी आए ही नहीं डर के मारे । उनको फ़ोन मिला के बुलाया गया उनको कुछ खिला पिला के होली के लिए तैयार किया गया। फ़िर तो उनकी जो गत बनाई बस पूछो मत। उनके शरीर का जो भी हिस्सा दिख रहा था वोह सब रंग जा चुका था । १:३० बज चुके थे हम सब भी थक चुके थे तो होली को वहीं विराम दिया गया और कांजी और पकोडे खा के अपने घर को आगये। घर आके नहा धो के सो गये ...... इस तरह हमने होली मनाई । आशा है आप सब की होली खुशी और उल्लास के साथ हो ली होगी ।

सौरभ शर्मा

Mar 10, 2009

होली का त्यौहार

गुलाल का रंग,
गुलाब की मार,
सूरज की किरण
खुशियों की बहार
चाँद की चांदनी
और अपनों का प्यार
मुबारक हो आपको
होली का त्यौहार


May GOD spray COLOURS of success
and
Prosperity over you
Have a joyous

HOLI



--
सौरभ शर्मा

Mar 3, 2009

बसंत ऋतु

बसंत ऋतु चल रही है और मेरा दिल तो पागल है जो यह कुछ कुछ सोचता है । दिल कहता है बसंत में तो हर तरफ़ बसंती रंग बहार छा जाती है। अब इसको मैं समझा समझा के थक चुका हूँ कि यह सब पुराने ज़माने कि बातें हैं ऑर्थोडॉक्स दिलों की!!! अब खेतों में सरसों नहीं बिल्डिंग दिखाई देती हैं। जम्मू कश्मीर में तो केसर कब का अपना रंग बन्दूक के डर के कारण छोरचुका है। अब लड़कियां "रंग दे बसंती दुपट्टा" कह ही नहीं सकती, क्योंकि अब तो जमाना पिंक पैंटी का है। अब बच्चे फूलों के खेतों में नहीं, कंप्यूटर पे खेलते हैं। अब लड़कियां पानी भरने पनघट पे नहीं जाती वोह तो पब जाती हैं। लड़कों को लड़कियों को छेड़ने से फुर्सत मिले तो कुछ और सोचे!!

दिल तो पर कहता है कि होली तो अब भी होती है अब उसको कैसे समझाऊं अब होली मिलने मिलाने और दुश्मनी भुलाने का त्यौहार ना होके गूंदागर्दी करने का दिन है शराब पी के लड़कियों को छेड़ने का दिन है।

पता नहीं बसंत ऋतु फ़िर से हर्षौल्लास, उमंग की ऋतु कब बनेगी या कभी बनेगी भी या नहीं !!!!!!!!

जिज्ञासु
सौरभ शर्मा

Mar 1, 2009

यमुना नदी या नाला

इस शनिवार (२८ फरवरी ) को मैं ऑफिस से आरहा था तो मेट्रो जैसे ही कश्मीरी गेट स्टेशन से निकल कर शास्त्री पार्क की तरफ़ बढ़ी और पुल के उप्पर पहुँची तो एक छोटे से बच्चे ने अपनी माँ से कहा की देखो कितना बड़ा नाला !!! तब माँ ने उसको बताया की नहीं बेटा यह नाला नहीं यह तो वो पवित्र नदी है जिसके किनारे कृष्ण भगवान् पले बड़े हैं इसका नाम यमुना नदी है। वोह लड़का भी आश्चर्य से देखने लगा उसको विश्वास नहीं हो रहा था। मैं भी सोचने लगा की क्या यह अब भी नदी है। जिसमे मछली भी जिन्दा नहीं रह सकती है जबकि इतिहास गवाह है की सभी सभ्यताएं नदियों के किनारे ही पली बड़ी हैं। दिल्ली का भी इतिहास इसलिए सदियों पुराना है क्योंकि यह इस यमुना नदी के किनारे है। आज यह जीवनदायनी नदी की बजाये एक नाला बन कर रह गई है। हर साल सरकार करोडो रूपये इसकी सफाई पर खर्च करती है (ऐसा दावा तो किया ही जाता है ) फ़िर भी स्थिति ख़राब ही हो रही है



सरकार कब इस बारें में सच्चाई से सोचेगी और इस पवित्र यमुना नदी का उद्धार हो पायेगा ....

जिज्ञासु
सौरभ शर्मा

Feb 23, 2009

महा शिवरात्रि

महा शिवरात्रि
आज महा शिवरात्रि की छुट्टी होने के कारण घर पे हूँ। सुबह सुबह नहा धोकर मन्दिर गया की चलो भोले शंकर पे जल चढा आए, मन्दिर पहुँच कर देखा तो बहुत लम्बी लाइन लगी थी । लाइन लगने का कारण था लोगो का ज्यादा समय तक शिवलिंग को घेरे रखना जैसे आज का दिन ही मिला है कल तो पता नहीं आशुतोष नाराज हो जायेंगे सो आज ही नीलकंठ को जितना खुश करलो उतना अच्छा। पूरे वर्ष भर के पाप धोलो आज ही। पूरे साल चाहे ईश्वर को याद करो या न करो आज तो कर ही लो ....
चन्द्रमौली भी सभी से जल मिश्रित दूध का स्नान ग्रहण कर रहे थे। हमने भी महाकाल को स्नान करवाया भांग धतुरा बेल और पता नहीं क्या क्या ( जो दुकान वाले ने आज कि पूजा पैकेज में रखा था ) अर्पित किया दीप धूप जलाया और त्र्यम्बकेश्वर को प्रणाम करके घर आगये। नटराज से प्रार्थना है कि सभी का कल्याण करें देवाधिदेव !!!!!

सौरभ शर्मा

मेट्रो के ज़माने में एक्सप्रेस इंजिन

हमारे एक मित्र जो अभी तक कुवांरें होने का मजा लूट रहें है एक बार हमारे पास आए बोले अभी एक कन्या को देख कर दिल उछालें मरने लगा जरा देखो. हमें जब देखा तो सही में उनका दिल जोर जोर से धड़क रहा था हमने बोल दिया किया एक्सप्रेस ट्रेन के इंजिन की तरहधड़क रहा है. वोह गुस्से से लाल पीले हो गये और बोले "
मेट्रो के ज़माने में केवल एक्सप्रेस इंजिन की तरह ???? मेट्रो न सही कम से कम राजधानी या शताब्दी का इंजिन ही बोल दिया होता हम यह सोच लेते की तुम मेट्रो सिटी में नहीँ रहते".
हम सोच में पड़ गए की मेट्रो का इंजन तो धड़क धड़क करता ही नहीं. मेट्रो में वो बात कहाँ जो एक्सप्रेस रेल गाड़ी में होती है. क्या मेट्रो में लोग सो के, लटक के, या छत पे चढ़ के सफर कर सकते है?? और अगर ट्रेन उत्तर प्रदेश या बिहार में होतो लोग इंजिन में ही सफर कर सकते हैं. तभी ख़याल आया हमारे रेल मंत्री जी ने तो बुल्लेट ट्रेन चलाने की घोषणा की है ...... तो आखिर में हमने कह ही दिया यार तुम्हारा दिल तो बुल्लेट ट्रेन के इंजिन की तरह चल रहा है. ( पता नहीं वोह ट्रेन कब आएगी अपने इस भारत में !!!! आ \गई तो क्या वोह हमारे देश में चल पायेगी जहाँ मेल गाड़ी भी अपनी पटरी से उतर के खेतों में गन्ने खाने चली जाती हैं ......

खैर हमारे दोस्त का दिल तो बहल ही गया ना (और हमारे देश के वोटरों का भी ..)


जिज्ञासु नागरिक
सौरभ शर्मा

Feb 17, 2009

मेरा वैलेंटाइन डे ...

मेरा वैलेंटाइन डे ...
१४ फरवरी को मैंने भी वैलेंटाइन डे मनाया पर कुछ अलग अंदाज में!!!
असल में १४ फ़रवरी को मेरी कंपनी ने फॅमिली डे का आयोजन किया था। पहले मेरा वहां जाने का मन नहीं था क्योंकि मेरी श्रीमती जी की तबियत ठीक नहीं थी पर प्रभु इच्छा से वोह ठीक हो गई और उनके ही जोर देने पर मन बना की चलो चलेंगे। सुबह घर का कार्य निबटा नास्ता करने बैठे थे की मेरे कॉलेज का दोस्त आगया उसके लैपटॉप में कुछ प्रॉब्लम थी, सो उसको देखने लगे उसमे ही १२ बज गए जबकि फॅमिली डे का प्रोग्राम १२ बजे से ही शुरू था और वोह भी महरोली- गुडगाँव रोड पर एक फार्म हाउस में। एक बार तो लगा की जाने का कुछ फायदा ही नहीं होगा क्योंकि घर से वहां तक पहुंचने में ही २ घंटे लग जायेंगे। पर श्रीमति जी और मम्मी के कहने पर हम तयार हुए। बेटे राघव को भी तयार किया और हम १:३० बजे घर से निकल पड़े। ३ बजे के करीब हम आयोजन स्थल पे पहुँच गए।

वहां पहुँच के पता चला की हम पीली टीम में हैं और अब खेल में भाग लेना है। मैं वन लेग रेस और तग वार में भाग लिया और दोनों ही खेलों में दुसरे नम्बर पे रहे। और भी खेल हुए। बड़ा मजा आया। शाम को तम्बोला खेला गया और फ़िर पुरस्कार दिए गए हमारे सी ई ओ की पत्नी द्बारा। हरएक बच्चे को कुछ न कुछ दिया गया। मेरे बेटे राघव को भी गिफ्ट मिला।

फ़िर डिनर का भी प्रावधान था पर समय अधिक होने के कारण हम वहां से ९:१५ निकल गए। सही में ऐसा वैलेंटाइन डे उस दिन से पहले नहीं मनाया था। मैं तो सोच रहा था की वैलेंटाइन मनाने का इससे अच्छा कोई तरीका नहीं है। अपने दोस्तों के बीच मस्ती खेल कूद और बहुत सारा मजा । क्या इससे अच्छा तरीका है कोई ?

जिज्ञासु
सौरभ शर्मा

हरिद्वार यात्रा --२ रा भाग


हरिद्वार यात्रा --२ रा भाग
पहली कड़ी यहाँ है।

पहले कुछ टिप्पणियों के जवाब, यात्रा की कुल दूरी थी ३०० कि. मी। हमने हरिद्वार पहुँचने में समय लिया ६ घंटे। आपकी टिप्पणियों के लिए धन्यबाद। अगली सुबह ( ०१ फरवरी ) को हम सो कर उठे तो ताज़ा महसूस कर रहे थे । मैं और पापा हम लोग जल्दी से हर कि पौडी कि तरफ भागे क्योंकि आरती हो रही थी। जल्दीबाजी में मैं कैमरा साथ लेना भूल गया । फ़िर वापस होटल में आकर कैमरा निकला और घाट पे आकर कुछ फोटो खींच ली। घाट पे सुबह- सुबह ठंडी ठंडी हवा चल रही थी। वहां इस शुद्ध हवा का आनन्द लिया क्योंकि दिल्ली में तो अब यह एहसास लेना मुश्किल हो गया है। फ़िर कुछ चाय पीकर हम जिस प्रयोजन से यहाँ आए थे उस केलिए चल दिए। एक नाई हमें रास्ते में ही मिल गया और हम मुंडन घाट पे पहुँच गये। और नाई मोल भावः करके शुरू हो गया। राघव ने जो रोना शुरू किया तो बस हम सब का बुरा हाल था मेरी बहन कि गोदी में तो वोह संभल ही नहीं पा रहा था फ़िर पापा ने भी पकड़ा तब जाके उसका मुंडन हो पाया। फ़िर नाई और पंडित को शगुन दिया और हम चल दिए ब्रह्म घाट पे नहाने के लिए। पहले राघव और मेरे भांजे ईशान को नहलाया गया। कितना ठंडा पानी था ...... पैर पानी में डालते ही सुन्न हो रहे थे। मैंने तो ४ -५ डुबकी लगा ली। वैसे डुबकी लगाने के बाद फ़िर ठण्ड नहीं लगी। सब ने ऐसे ही जल्दी जल्दी नहाया फ़िर गंगा जी कि पूजा की। पूजा में फूल और दूध को गंगा जी में प्रवाहित किया गया।
मैं सोच रहा था कि हमारी पूजा में दूध का क्या महत्व है फ़िर ध्यान आया इससे नदी को स्वच्छ रखने में सहायता मिलती है इसलिए हमारे ऋषि मुनियों ने यह प्रावधान किया। फ़िर ३ कैन गंगा जी का जल भरा गया ले जाने के लिए । इन सब में १२:०० बज चुके थे इतने में पता चला कि हमारे होटल के सामने सड़क ख़ुद रही है सीवर डालने के लिए तो हमको अपनी गाड़ी निकालनी पड़ेगी और हम बिना नास्ता किए जल्दी जल्दी सामान गाड़ी में डाल हरिद्वार से विदा ली।

वापसी में हाई वे न लेकर फ़िर गंगा नहर के किनारे का ही रास्ता पकड़ा हरिद्वार से सीधे मुरादनगर नगर जा पहुंचे। यह रास्ता आराम से निकल गया क्योंकि इस रास्ते पे ज्यादा ट्रैफिक नहीं था। गाजियाबाद में घुसते ही ट्रैफिक जाम शुरू हो गया। पर अब मन को तस्सली थी कि अब तो घर पहुंचे ही वाले हैं । वैशाली में बहन को उतार कर हम अपने प्यारे घर पहुंच गए......

Feb 14, 2009

हरिद्वार यात्रा,

हरिद्वार यात्रा,
जनवरी के आखरी दिन हरिद्वार जाने का मौका मिला। मौका भी ख़ास! मेरे बेटे का मुंडन !! ३१ जनवरी को दिन १:३० अपराह्न को अपनी गाड़ी निकली घर से चलपड़े हरिद्वार की तरफ़ । साथ में थे मेरे पापा मम्मी और बेटा "राघव"। राघव की मम्मी को तो हमने उसके स्कूल से लिया। रास्ते में से अपनी बहन और भांजे को बैठा लिया और गाड़ी चल दी मेरठ रोड पे। रास्ते में हम उत्तर प्रदेश तकनिकी विश्व विद्यालय से संबधित तकनिकी एवं प्रबंधन संस्थान गिनते जा रहे थे गिनती २० के बाद बंद कर दी । खतौली पहुंचे तो पता चला मुख्य मार्ग पे जाम लगा हुआ है। एक बार तो लगा हम हरिद्वार जा ही नहीं पाएंगे पर कुछ स्थानीय लोगो ने एक और रास्ता बताया जो गंगा नहर के साथ साथ था , डरते डरते गाड़ी उसी रास्ते पर चला दी। रास्ता अच्छा था कुछ दूर चलने पर हमने नहर के किनारे लंच किया। शाम होते होते हम बहादराबाद पहुँच गए। अब यह सोचा गया की पहले अपने प्लाट पे चला जाए जो
बहादराबाद के पास ही था। सो हम अपने प्लाट पे होते हुए हरिद्वार की तरफ़ चल दिए इतने और दिन ढल गया। अब हमें यह डर सता रहा था की गाड़ी कहाँ पार्क करेंगे और होटल कहाँ मिलेगा। पापा ने कहा हर की पौडी के पास में ही अप्पर रोड पे होटल हैं। यह देख के अच्छा लगा की गाड़ी हर की पौडी तक ही पहुँच गई और हमें होटल भी वहीँ मिल गया । पता चला की आरती तो ख़तम हो चुकी है सो अब हमारे पास खाना खाने के अलावा कोई काम नहीं था सो पास ही के एक भोजनालय में खाना खाया। फ़िर दूध पीने के लिए आधा बाज़ार घूमना पड़ा जब जाके दूध वाला मिला। पेट पूजा करके हम सब अपने कमरे में आके रजाई में घुस गये


बाकी अगली कड़ी में ॥


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सौरभ शर्मा

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Feb 9, 2009

पब भरो आन्दोलन

पब भरो आन्दोलन

मंगलोर में कुछ असामाजिक तत्वों ने एक पब में जो कुकर्त्य किया उसका जवाब हमारी माननीय मंत्री महोदया श्रीमति रेणुका चोधरी जी ने पब भरो आन्दोलन का आव्हान से किया ! हमारी महिला एवं बाल विकास मंत्री समझती है इससे हमारा सामाजिक विकास होगा। इसलिए सभी महिलाओ / लड़कियों को पब में जाना चाहिए और मद्य पान भी करना चाहिए। एक कुकर्तय का जवाब एक कुकर्तय ही हो सकता है !!! हमारी मंत्री महोदया को मद्य पान करने के गुण अवगुण तो पता ही होगें । खैर ......

मेरे इस जिज्ञासु मन में एक विचार आया की अगर कल को किसी ने हनुमान सेना या अंगद सेना (या कोई और नाम की सेना, क्योंकि हमारे हिंदू धर्म में ३६ करोड़ देवी देवता है तो इतनी सेना तो आराम से हो सकती हैं ) बना ली ओर १, २ लड़कियों को ध्रूम पान करने पर चांटा मार दिया तो .............

हमारी मंत्री महोदया ध्रूम पान करो आन्दोलन का आवाहन करेगी। उससे तो हमारे स्वाथ्य मंत्री अम्बुमणि रामादौस का क्या होगा जो फिल्मो में भी इस के विरोधी हैं।

हैं ना परेशानी........

जिज्ञासु
सौरभ शर्मा

Feb 6, 2009

Thinking hard about life

I got this in my e-mail from one of my friend. After reading I thought that it is so true and everyone should consider it so here I am posting it (with thanks to unknown writer ...)

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Here i am sitting in my office @ night...

Thinking hard about life
How it changed from a maverick college life to strict professional life......

How tiny pocket money changed to huge monthly paychecks
but then why it gives lesss happiness....

How a few local denim jeans changed to new branded wardrobe
but then why there are less people to use them

How a single plate of samosa changed to a full Pizza or burger
But then why there is less hunger.....

Here i am sitting in my office @ night...
Thinking hard about life
How it changed.....

How a bike always in reserve changed to bike always on
but then why there are less places to go on......

How a small coffee shop changed to cafe coffee day
but then why it feels like shop is far away.....

How a limited prepaid card changed to postpaid package
but then why there are less calls & more messages......

Here i am sitting in my office @ night...
Thinking hard about life
How it changed.....

How a general class journey changed to Flight journey
But then why there are less vacations for enjoyment....

How a old assembled desktop changed to new branded laptop
but then why there is less time to put it on..........

How a small bunch of friends changed to office mate
But then why we always feel lonely n miss those college frnz.....

Here i am sitting in my office @ night...
Thinking hard about life
How it changed..... How it changed........

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What you think after reading ......
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Saurabh Sharma

Jan 19, 2009

कला को इस सब राजनीति से अलग रखना चाहिए????

शनिवार की शाम को IBN ७ पर एक परिचर्चा आ रही थी जिसका मुद्दा था पाकिस्तानी कलाकारों को भारत से निकालना सही है या ग़लत? कुछ भाग लेने वाले कलाकारोंका मत था की अब २६ नवम्बर की घटना के बाद पाकिस्तान के कलाकारों को भारत से निकाल देना चाहिए, और कुछ कलाकारों के मत था की कला को इस सब राजनीति से अलग रखना चाहिए.

इस विषय में मैं कुछ मूर्धन्य कलाकारों से पूछना चाहता हूँ की अगर तुम्हारा पड़ोसी तुम्हारे भाई को मार दे तो भी तुम उस पड़ोसी के भाई की शादी में जा के गाना गाओगे ? क्योंकि कला को तो हमें अलग रखना चाहिए.!!!!
इस राष्ट्र के चाहे कितने भी टुकरे हो जाए पर कला या कलाकारों को इससे कोई मतलब नहीं उन्हें तो यह चिंता है पाकिस्तानी कलाकारों को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए.


क्या देश के बिना कला या ऐसे कलाकार रह पाएंगे ???

आप क्या सोचते हैं? जरुर बताएं ...

जिज्ञासु नागरिक,
सौरभ शर्मा

Jan 2, 2009

सादर नमस्कार

सादर नमस्कार


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कश्मीर तुम्हारे आँगन में हम पुष्प चढ़ाने आयेगे,
खेली है होली खूनों से हम दीप जलाने आयेगे|
जो घाटी कल तक गुलशन थी नावों में मंगल होते थे,
कितनें ही नव दम्पत्तियों के भाग्य के लेखे बनते थे|
कश्मीर आज वीरान हो तुम फिर से आवाद बनायेगे,
खेली है होली खूनों से हम दीप जलाने आयेगे|
ऊँचा मस्तक ऊँची चोटी वक्षस्थल जिसका तना हुआ.
पानी बरसे या चले बरछी जिसने सब कुछ है बहुत सहा|
कश्मीर तुम्हारे द्वार पर हम बन्दनबार लगायेगे,
खेली है होली खूनों से हम दीप जलाने आयेगे|

Jan 1, 2009

May this year mark the beginning of a year of pleasure and discovery for you. May each day hold something special, that is wonderful and new...
For you deserve the best of everything, that life can ever bring.
Happy New Year 2009







“ FAITH makes all things Possible “

“Hope makes all things Work”

“Love makes all things Beautiful “


May you have all the Three for the NEW YEAR 2009







Wishing you a New Year Sparkling with Happiness, Success and Joy.
A Very Happy New Year 2009 to you.



With Warm Regards

Saurabh Sharma