Feb 23, 2009

महा शिवरात्रि

महा शिवरात्रि
आज महा शिवरात्रि की छुट्टी होने के कारण घर पे हूँ। सुबह सुबह नहा धोकर मन्दिर गया की चलो भोले शंकर पे जल चढा आए, मन्दिर पहुँच कर देखा तो बहुत लम्बी लाइन लगी थी । लाइन लगने का कारण था लोगो का ज्यादा समय तक शिवलिंग को घेरे रखना जैसे आज का दिन ही मिला है कल तो पता नहीं आशुतोष नाराज हो जायेंगे सो आज ही नीलकंठ को जितना खुश करलो उतना अच्छा। पूरे वर्ष भर के पाप धोलो आज ही। पूरे साल चाहे ईश्वर को याद करो या न करो आज तो कर ही लो ....
चन्द्रमौली भी सभी से जल मिश्रित दूध का स्नान ग्रहण कर रहे थे। हमने भी महाकाल को स्नान करवाया भांग धतुरा बेल और पता नहीं क्या क्या ( जो दुकान वाले ने आज कि पूजा पैकेज में रखा था ) अर्पित किया दीप धूप जलाया और त्र्यम्बकेश्वर को प्रणाम करके घर आगये। नटराज से प्रार्थना है कि सभी का कल्याण करें देवाधिदेव !!!!!

सौरभ शर्मा

मेट्रो के ज़माने में एक्सप्रेस इंजिन

हमारे एक मित्र जो अभी तक कुवांरें होने का मजा लूट रहें है एक बार हमारे पास आए बोले अभी एक कन्या को देख कर दिल उछालें मरने लगा जरा देखो. हमें जब देखा तो सही में उनका दिल जोर जोर से धड़क रहा था हमने बोल दिया किया एक्सप्रेस ट्रेन के इंजिन की तरहधड़क रहा है. वोह गुस्से से लाल पीले हो गये और बोले "
मेट्रो के ज़माने में केवल एक्सप्रेस इंजिन की तरह ???? मेट्रो न सही कम से कम राजधानी या शताब्दी का इंजिन ही बोल दिया होता हम यह सोच लेते की तुम मेट्रो सिटी में नहीँ रहते".
हम सोच में पड़ गए की मेट्रो का इंजन तो धड़क धड़क करता ही नहीं. मेट्रो में वो बात कहाँ जो एक्सप्रेस रेल गाड़ी में होती है. क्या मेट्रो में लोग सो के, लटक के, या छत पे चढ़ के सफर कर सकते है?? और अगर ट्रेन उत्तर प्रदेश या बिहार में होतो लोग इंजिन में ही सफर कर सकते हैं. तभी ख़याल आया हमारे रेल मंत्री जी ने तो बुल्लेट ट्रेन चलाने की घोषणा की है ...... तो आखिर में हमने कह ही दिया यार तुम्हारा दिल तो बुल्लेट ट्रेन के इंजिन की तरह चल रहा है. ( पता नहीं वोह ट्रेन कब आएगी अपने इस भारत में !!!! आ \गई तो क्या वोह हमारे देश में चल पायेगी जहाँ मेल गाड़ी भी अपनी पटरी से उतर के खेतों में गन्ने खाने चली जाती हैं ......

खैर हमारे दोस्त का दिल तो बहल ही गया ना (और हमारे देश के वोटरों का भी ..)


जिज्ञासु नागरिक
सौरभ शर्मा

Feb 17, 2009

मेरा वैलेंटाइन डे ...

मेरा वैलेंटाइन डे ...
१४ फरवरी को मैंने भी वैलेंटाइन डे मनाया पर कुछ अलग अंदाज में!!!
असल में १४ फ़रवरी को मेरी कंपनी ने फॅमिली डे का आयोजन किया था। पहले मेरा वहां जाने का मन नहीं था क्योंकि मेरी श्रीमती जी की तबियत ठीक नहीं थी पर प्रभु इच्छा से वोह ठीक हो गई और उनके ही जोर देने पर मन बना की चलो चलेंगे। सुबह घर का कार्य निबटा नास्ता करने बैठे थे की मेरे कॉलेज का दोस्त आगया उसके लैपटॉप में कुछ प्रॉब्लम थी, सो उसको देखने लगे उसमे ही १२ बज गए जबकि फॅमिली डे का प्रोग्राम १२ बजे से ही शुरू था और वोह भी महरोली- गुडगाँव रोड पर एक फार्म हाउस में। एक बार तो लगा की जाने का कुछ फायदा ही नहीं होगा क्योंकि घर से वहां तक पहुंचने में ही २ घंटे लग जायेंगे। पर श्रीमति जी और मम्मी के कहने पर हम तयार हुए। बेटे राघव को भी तयार किया और हम १:३० बजे घर से निकल पड़े। ३ बजे के करीब हम आयोजन स्थल पे पहुँच गए।

वहां पहुँच के पता चला की हम पीली टीम में हैं और अब खेल में भाग लेना है। मैं वन लेग रेस और तग वार में भाग लिया और दोनों ही खेलों में दुसरे नम्बर पे रहे। और भी खेल हुए। बड़ा मजा आया। शाम को तम्बोला खेला गया और फ़िर पुरस्कार दिए गए हमारे सी ई ओ की पत्नी द्बारा। हरएक बच्चे को कुछ न कुछ दिया गया। मेरे बेटे राघव को भी गिफ्ट मिला।

फ़िर डिनर का भी प्रावधान था पर समय अधिक होने के कारण हम वहां से ९:१५ निकल गए। सही में ऐसा वैलेंटाइन डे उस दिन से पहले नहीं मनाया था। मैं तो सोच रहा था की वैलेंटाइन मनाने का इससे अच्छा कोई तरीका नहीं है। अपने दोस्तों के बीच मस्ती खेल कूद और बहुत सारा मजा । क्या इससे अच्छा तरीका है कोई ?

जिज्ञासु
सौरभ शर्मा

हरिद्वार यात्रा --२ रा भाग


हरिद्वार यात्रा --२ रा भाग
पहली कड़ी यहाँ है।

पहले कुछ टिप्पणियों के जवाब, यात्रा की कुल दूरी थी ३०० कि. मी। हमने हरिद्वार पहुँचने में समय लिया ६ घंटे। आपकी टिप्पणियों के लिए धन्यबाद। अगली सुबह ( ०१ फरवरी ) को हम सो कर उठे तो ताज़ा महसूस कर रहे थे । मैं और पापा हम लोग जल्दी से हर कि पौडी कि तरफ भागे क्योंकि आरती हो रही थी। जल्दीबाजी में मैं कैमरा साथ लेना भूल गया । फ़िर वापस होटल में आकर कैमरा निकला और घाट पे आकर कुछ फोटो खींच ली। घाट पे सुबह- सुबह ठंडी ठंडी हवा चल रही थी। वहां इस शुद्ध हवा का आनन्द लिया क्योंकि दिल्ली में तो अब यह एहसास लेना मुश्किल हो गया है। फ़िर कुछ चाय पीकर हम जिस प्रयोजन से यहाँ आए थे उस केलिए चल दिए। एक नाई हमें रास्ते में ही मिल गया और हम मुंडन घाट पे पहुँच गये। और नाई मोल भावः करके शुरू हो गया। राघव ने जो रोना शुरू किया तो बस हम सब का बुरा हाल था मेरी बहन कि गोदी में तो वोह संभल ही नहीं पा रहा था फ़िर पापा ने भी पकड़ा तब जाके उसका मुंडन हो पाया। फ़िर नाई और पंडित को शगुन दिया और हम चल दिए ब्रह्म घाट पे नहाने के लिए। पहले राघव और मेरे भांजे ईशान को नहलाया गया। कितना ठंडा पानी था ...... पैर पानी में डालते ही सुन्न हो रहे थे। मैंने तो ४ -५ डुबकी लगा ली। वैसे डुबकी लगाने के बाद फ़िर ठण्ड नहीं लगी। सब ने ऐसे ही जल्दी जल्दी नहाया फ़िर गंगा जी कि पूजा की। पूजा में फूल और दूध को गंगा जी में प्रवाहित किया गया।
मैं सोच रहा था कि हमारी पूजा में दूध का क्या महत्व है फ़िर ध्यान आया इससे नदी को स्वच्छ रखने में सहायता मिलती है इसलिए हमारे ऋषि मुनियों ने यह प्रावधान किया। फ़िर ३ कैन गंगा जी का जल भरा गया ले जाने के लिए । इन सब में १२:०० बज चुके थे इतने में पता चला कि हमारे होटल के सामने सड़क ख़ुद रही है सीवर डालने के लिए तो हमको अपनी गाड़ी निकालनी पड़ेगी और हम बिना नास्ता किए जल्दी जल्दी सामान गाड़ी में डाल हरिद्वार से विदा ली।

वापसी में हाई वे न लेकर फ़िर गंगा नहर के किनारे का ही रास्ता पकड़ा हरिद्वार से सीधे मुरादनगर नगर जा पहुंचे। यह रास्ता आराम से निकल गया क्योंकि इस रास्ते पे ज्यादा ट्रैफिक नहीं था। गाजियाबाद में घुसते ही ट्रैफिक जाम शुरू हो गया। पर अब मन को तस्सली थी कि अब तो घर पहुंचे ही वाले हैं । वैशाली में बहन को उतार कर हम अपने प्यारे घर पहुंच गए......

Feb 14, 2009

हरिद्वार यात्रा,

हरिद्वार यात्रा,
जनवरी के आखरी दिन हरिद्वार जाने का मौका मिला। मौका भी ख़ास! मेरे बेटे का मुंडन !! ३१ जनवरी को दिन १:३० अपराह्न को अपनी गाड़ी निकली घर से चलपड़े हरिद्वार की तरफ़ । साथ में थे मेरे पापा मम्मी और बेटा "राघव"। राघव की मम्मी को तो हमने उसके स्कूल से लिया। रास्ते में से अपनी बहन और भांजे को बैठा लिया और गाड़ी चल दी मेरठ रोड पे। रास्ते में हम उत्तर प्रदेश तकनिकी विश्व विद्यालय से संबधित तकनिकी एवं प्रबंधन संस्थान गिनते जा रहे थे गिनती २० के बाद बंद कर दी । खतौली पहुंचे तो पता चला मुख्य मार्ग पे जाम लगा हुआ है। एक बार तो लगा हम हरिद्वार जा ही नहीं पाएंगे पर कुछ स्थानीय लोगो ने एक और रास्ता बताया जो गंगा नहर के साथ साथ था , डरते डरते गाड़ी उसी रास्ते पर चला दी। रास्ता अच्छा था कुछ दूर चलने पर हमने नहर के किनारे लंच किया। शाम होते होते हम बहादराबाद पहुँच गए। अब यह सोचा गया की पहले अपने प्लाट पे चला जाए जो
बहादराबाद के पास ही था। सो हम अपने प्लाट पे होते हुए हरिद्वार की तरफ़ चल दिए इतने और दिन ढल गया। अब हमें यह डर सता रहा था की गाड़ी कहाँ पार्क करेंगे और होटल कहाँ मिलेगा। पापा ने कहा हर की पौडी के पास में ही अप्पर रोड पे होटल हैं। यह देख के अच्छा लगा की गाड़ी हर की पौडी तक ही पहुँच गई और हमें होटल भी वहीँ मिल गया । पता चला की आरती तो ख़तम हो चुकी है सो अब हमारे पास खाना खाने के अलावा कोई काम नहीं था सो पास ही के एक भोजनालय में खाना खाया। फ़िर दूध पीने के लिए आधा बाज़ार घूमना पड़ा जब जाके दूध वाला मिला। पेट पूजा करके हम सब अपने कमरे में आके रजाई में घुस गये


बाकी अगली कड़ी में ॥


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सौरभ शर्मा

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Feb 9, 2009

पब भरो आन्दोलन

पब भरो आन्दोलन

मंगलोर में कुछ असामाजिक तत्वों ने एक पब में जो कुकर्त्य किया उसका जवाब हमारी माननीय मंत्री महोदया श्रीमति रेणुका चोधरी जी ने पब भरो आन्दोलन का आव्हान से किया ! हमारी महिला एवं बाल विकास मंत्री समझती है इससे हमारा सामाजिक विकास होगा। इसलिए सभी महिलाओ / लड़कियों को पब में जाना चाहिए और मद्य पान भी करना चाहिए। एक कुकर्तय का जवाब एक कुकर्तय ही हो सकता है !!! हमारी मंत्री महोदया को मद्य पान करने के गुण अवगुण तो पता ही होगें । खैर ......

मेरे इस जिज्ञासु मन में एक विचार आया की अगर कल को किसी ने हनुमान सेना या अंगद सेना (या कोई और नाम की सेना, क्योंकि हमारे हिंदू धर्म में ३६ करोड़ देवी देवता है तो इतनी सेना तो आराम से हो सकती हैं ) बना ली ओर १, २ लड़कियों को ध्रूम पान करने पर चांटा मार दिया तो .............

हमारी मंत्री महोदया ध्रूम पान करो आन्दोलन का आवाहन करेगी। उससे तो हमारे स्वाथ्य मंत्री अम्बुमणि रामादौस का क्या होगा जो फिल्मो में भी इस के विरोधी हैं।

हैं ना परेशानी........

जिज्ञासु
सौरभ शर्मा

Feb 6, 2009

Thinking hard about life

I got this in my e-mail from one of my friend. After reading I thought that it is so true and everyone should consider it so here I am posting it (with thanks to unknown writer ...)

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Here i am sitting in my office @ night...

Thinking hard about life
How it changed from a maverick college life to strict professional life......

How tiny pocket money changed to huge monthly paychecks
but then why it gives lesss happiness....

How a few local denim jeans changed to new branded wardrobe
but then why there are less people to use them

How a single plate of samosa changed to a full Pizza or burger
But then why there is less hunger.....

Here i am sitting in my office @ night...
Thinking hard about life
How it changed.....

How a bike always in reserve changed to bike always on
but then why there are less places to go on......

How a small coffee shop changed to cafe coffee day
but then why it feels like shop is far away.....

How a limited prepaid card changed to postpaid package
but then why there are less calls & more messages......

Here i am sitting in my office @ night...
Thinking hard about life
How it changed.....

How a general class journey changed to Flight journey
But then why there are less vacations for enjoyment....

How a old assembled desktop changed to new branded laptop
but then why there is less time to put it on..........

How a small bunch of friends changed to office mate
But then why we always feel lonely n miss those college frnz.....

Here i am sitting in my office @ night...
Thinking hard about life
How it changed..... How it changed........

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What you think after reading ......
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Saurabh Sharma