Feb 23, 2009

मेट्रो के ज़माने में एक्सप्रेस इंजिन

हमारे एक मित्र जो अभी तक कुवांरें होने का मजा लूट रहें है एक बार हमारे पास आए बोले अभी एक कन्या को देख कर दिल उछालें मरने लगा जरा देखो. हमें जब देखा तो सही में उनका दिल जोर जोर से धड़क रहा था हमने बोल दिया किया एक्सप्रेस ट्रेन के इंजिन की तरहधड़क रहा है. वोह गुस्से से लाल पीले हो गये और बोले "
मेट्रो के ज़माने में केवल एक्सप्रेस इंजिन की तरह ???? मेट्रो न सही कम से कम राजधानी या शताब्दी का इंजिन ही बोल दिया होता हम यह सोच लेते की तुम मेट्रो सिटी में नहीँ रहते".
हम सोच में पड़ गए की मेट्रो का इंजन तो धड़क धड़क करता ही नहीं. मेट्रो में वो बात कहाँ जो एक्सप्रेस रेल गाड़ी में होती है. क्या मेट्रो में लोग सो के, लटक के, या छत पे चढ़ के सफर कर सकते है?? और अगर ट्रेन उत्तर प्रदेश या बिहार में होतो लोग इंजिन में ही सफर कर सकते हैं. तभी ख़याल आया हमारे रेल मंत्री जी ने तो बुल्लेट ट्रेन चलाने की घोषणा की है ...... तो आखिर में हमने कह ही दिया यार तुम्हारा दिल तो बुल्लेट ट्रेन के इंजिन की तरह चल रहा है. ( पता नहीं वोह ट्रेन कब आएगी अपने इस भारत में !!!! आ \गई तो क्या वोह हमारे देश में चल पायेगी जहाँ मेल गाड़ी भी अपनी पटरी से उतर के खेतों में गन्ने खाने चली जाती हैं ......

खैर हमारे दोस्त का दिल तो बहल ही गया ना (और हमारे देश के वोटरों का भी ..)


जिज्ञासु नागरिक
सौरभ शर्मा