Jun 30, 2015

Bhagwat Gita Ch 1 V 6

Bhagwat Gita
युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान् |
सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथा: || ६ ||

Yudhamanyusch vikrant uttamujasch viryavaan
Saubhadro draupadeyasch sarv ev maharatha
Ch. 1 – verse 6


विक्रान्त युधामन्यु, वीर्यवान उत्तमौजा, सुभद्रापुत्र (अभिमन्यु), और द्रोपदी के पुत्र - सभी महारथी हैं।

Jun 29, 2015

Bhagvat Gita Ch 1 - V 5

Bhagvat Gita


धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान् |
पुरुजित् कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङ्गवः || ५ ||

dhrshketus chekitan kashirajas ch viryavan 
purujit kuntibhojsch saibyasch narapungavah

धृष्टकेतु, चेकितान, बलवान काशिराज, 
पुरुजित, कुन्तिभोज तथा नरश्रेष्ट शैब्य है 

ch. 1 verse: 5

Jun 27, 2015

Bhagwat Gita ch 1 v 4

Bhagwat Gita

अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि |
युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथ: || ४ ||

atra shura maheshvasa bheema arjun sama yudhi 
yuyudhano viratsch drupadsch maharath

इस सेना में बड़े-बड़े धनुषोंवाले  तथा युद्ध में भीम और अर्जुन के समान 
शूरवीर सात्यकि और विराट तथा महारथी राजा द्रु पद हैं

Jun 25, 2015

Bhagwat Gita ch1 v 3

Bhagwat Gita
पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम्।
व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता॥१-३॥

Pasytam pandu-putranam Acharya mahtim chamum
Vyudham drupada-putrena tava shishyena dhimata
Ch. 1 – verse 3

हे आचार्य, आप के तेजस्वी शिष्य द्रुपदपुत्र द्वारा व्यवस्थित की इस विशाल पाण्डू सेना को देखिये।

Jun 24, 2015

Bhagwat Gita ch. 1 - v -2

Bhagwat Gita
सन्जय उवाच
द्रष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा |
आचार्यमुपसन्ग्म्य राजा वचनमब्रवीत || २ ||

Sanjay uvacha:
Drstva tu pandavanikam vyudham duryodhanstada acharyam  upasangamya raja cachanam abravit
Ch. 1 – verse 2

संजय बोले :
हे राजन, पांडवों की व्यूह रचना देख कर दुर्योधन ने अपने आचार्य के पास जा कर उनसे कहा 

Jun 23, 2015

Bhagwat Gita ch. 1 v. 1

Bhagwat Gita

धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सव: |
मामकाः पाण्डवा:चैव किमकुर्वत सञ्जय || ||


Dharam-ksetre kuru ksetre samveta yuyutsavah
Mamakah pandavas caiva kim akurvata sanjaya.
Ch. 1 – verse 1


धृतराष्ट्र बोले:
हे संजय, धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में युद्ध की इच्छा से इकट्ठे हुये मेरे और पाण्डव के पुत्रों ने क्या किया।