Jul 28, 2015

Bhagwad Gita Ch. 1 – Verse 30

Bhagwad Gita

न च शक्नोम्यवस्थातुं भ्रमतीव च मे मनः |
निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव || ३० ||

मैं अवस्थित रहने में अशक्त हो गया हूँ, मेरा मन भ्रमित हो रहा है। हे केशव, जो निमित्त है उसे में भी मुझे विपरीत ही दिखाई दे रहे हैं || १ – ३० ||