Jul 31, 2015

Bhagwat Gita Ch. 1 - verse 36

Bhagwat Gita

पापमेवाश्रयेदस्मान् हत्वैतानाततायिनः |
तस्मान्नार्हा वयं हन्तुं धार्तराष्ट्रान् सबान्धवान् |
स्वजनं हि कथं हत्वा सुखिनः स्याम माधव || ३६ ||

इन आततायिनों को मार कर हमें पाप ही प्राप्त होगा। इसलिये धृतराष्ट्र के पुत्रो तथा अपने अन्य संबन्धियों को मारना हमारे लिये उचित नहीं है। हे माधव, अपने ही स्वजनों को मार कर हमें किस प्रकार सुख प्राप्त हो सकता है।
|| १ – ३६ ||