Aug 26, 2015

Bhagwat Gita Ch. 2 ~ verse 2

Bhagwat Gita

 श्रीभगवानुवाच

कुतस्त्वा कश्मलमिदं विषमे समुपस्थितम् |
अनार्यजुष्टमस्वर्ग्यमकीर्तिकरमर्जुन   || २ - २ ||

 श्री भगवान् बोले :

हे अर्जुन , यह तुम किन विचारों में डूब रहे हो 
जो इस समय गलत हैं और स्वर्ग और कीर्ति के बाधक हैं  || ||